मुस्कुरा कर सभी से मिलता है
मुझसे क्यों बेरुख़ी से मिलता है
फूल भी खिल गये नमी पाकर
फ़ैज़ ये शब नमी से मिलता है
रोशनी बाँटता है जो सबको
रात भर चाँदनी से मिलता है
दुनिया वालों की बात क्या कीजे
दोस्त भी दुश्मनी से मिलता है
इक दफ़ा तुम मुझे मिलो आकर
तुमसे दिल आजिज़ी से मिलता है
जिसकी ख़ुशबू बसी है साँसों में
दर्द आतिश उसी से मिलता है
Aatish Muradabadi