मेरी सब संदूकें खाली, शगुन में तुमको मैं क्या दूँगा
कोष तुम्हारा भरने को बस गीत तुम्हारे नाम करूँगा
मैंने जो भी गीत लिखे हैं
सबमें तेरा नाम लिखा है
तुमको शीतलता की देवी
स्वयं को मैंने घाम लिखा है
मैं धूपों की पीड़ा लेकर ही खुद को शीतल कर लूँगा
कोष तुम्हारा भरने को बस गीत तुम्हारे नाम करूँगा
जब भी मैंने दर्पण देखा
बस तेरी परछाईं देखी
मैंने तेरा हँसना देखा
और तेरी तन्हाई देखी
अपनी सब तन्हाई मुझको, दे दो मैं सब दुख सह लूँगा
कोष तुम्हारा भरने को बस गीत तुम्हारे नाम करूँगा
मैंने जब भी कदम बढ़ाया
क़दम सभी ने पीछे खींचे
पर तेरे मन तक पहुँचा हूँ
अपनी आँखें मींचे-मींचे
मुझ तक जिस पथ आओगे तुम, बिछा हुआ मैं फूल मिलूँगा
कोष तुम्हारा भरने को बस गीत तुम्हारे नाम करूँगा
मेरी पीड़ा समझी जिसने
हाथ उसी का हाथ है मेरे
कहो प्रिये सावन-भादो सा
जीवन भर का साथ है मेरे
मैं सपनों का सौदागर हूँ, सारे सपनों को पर दूँगा
कोष तुम्हारा भरने को बस गीत तुम्हारे नाम करूँगा
सारी पीड़ा मुझको देना
मेरे सुख सब नाम तुम्हारे
श्रम सारा मेरे हिस्से हो
हिस्से में आराम तुम्हारे
इस दुनिया की सारी खुशियों से तेरा दामन भर दूँगा
कोष तुम्हारा भरने को सब गीत तुम्हारे नाम करूँगा
तुम जीवन का आलंबन हो
बिन तेरे मैं मर जाऊँगा
साथ अगर ये छूट गया फिर
जाने क्या-क्या कर जाऊँगा
धरती को कर दूँगा अंबर, अंबर को धरती कर दूँगा
कोष तुम्हारा भरने को सब गीत तुम्हारे नाम करूँगा
Arun Agrawal