Archana Diwedi

मंच बड़ा कवि भी बड़े,और बड़ा पेमेंट
फिर भी श्रोता उठ रहे,कहकर है अर्जेंट

झूठ,दंभ,छल से करे,कविता का व्यापार
उससे हैं मां छीनती,सुर,लय परमानेंट

हँसी,रूप,सौंदर्य से,नहीं बनेगी बात
प्रस्तुति में हो सादगी,हो कवित्व में सेंट

तुकबंदी में श्रेष्ठतम,रचना शिष्ट विशिष्ट
छंद बद्ध रस सिक्त हो,कर दे सेंटीमेंट

मां ने जिसको भी दिया,लिखने का सौभाग्य
भाषा,पेन उसके लिए,सुंदर ऑर्नामेंट
Archana Diwedi

Archana Diwedi | We The Sukhanwar