Archana Diwedi

फूल की पांखुरी तोडना मत कभी
चिट्ठियां नेह की मोड़ना मत कभी
जो तुम्हें प्रेम का देवता मान ले
आख़िरी साँस तक छोड़ना मत कभी
Archana Diwedi