ख़ार दुश्मन जो बिछाये तो कोई बात नहीं
राह पुर ख़ार भी आये तो कोई बात नहीं
हो सका जितना तुझे दिल में सँभाले रक्खा
आज दामन तू बचाये तो कोई बात नहीं
तुझसे उम्मीद.ए.वफ़ा हमने सनम रक्खी है
तू सितम और भी ढाये तो कोई बात नहीं
तूने बख़्शी थीं मेरी ज़ीस्त को ख़ुशियाँ फिर भी
अब अगर मुझको रुलाये तो कोई बात नहीं
दर्द तो यूँ भी ग़म.ए.दिल को मज़ा देता है
तू अगर दर्द बढ़ाये तो कोई बात नहीं
महफ़िल.ए.यार में मुझको न मिली कोई ख़ुशी
अब अगर जुल्म भी ढाये तो कोई बात नहीं
जिसकी हर बात पे था मुझको भरोसा आतिश
वो मुझे छोड़ के जाये तो कोई बात नहीं
Aatish Muradabadi