तुमने गर मुझको कभी दिल से पुकारा होता
फिर बुलन्दी पे मुहब्बत का सितारा होता
काश मिल जाती तेरे प्यार की दुनिया मुझको
ना कभी ऐसे ग़म-ए-दिल का ख़सारा होता
बस तख़य्युल है तेरी याद है तन्हाई है
काश ऐसे में मुझे तू ने पुकारा होता
अपने महबूब की बस एक झलक पाने को
यार बेचैन कभी दिल न हमारा होता
तू जो मिल जाता तो मिल जातीं जहाँ की ख़ुशियाँ
तेरा हर ज़ुल्मों सितम मुझ को गवारा होता
तिश्नगी होठों पे होती न नमी आँखों में
वक़्त-ए-आख़िर जो अगर साथ तुम्हारा होता
Aatish Muradabadi