Aatish Muradabadi

तुमने गर मुझको कभी दिल से पुकारा होता
फिर बुलन्दी पे मुहब्बत का सितारा होता

काश मिल जाती तेरे प्यार की दुनिया मुझको
ना कभी ऐसे ग़म-ए-दिल का ख़सारा होता

बस तख़य्युल है तेरी याद है तन्हाई है
काश ऐसे में मुझे तू ने पुकारा होता

अपने महबूब की बस एक झलक पाने को
यार बेचैन कभी दिल न हमारा होता

तू जो मिल जाता तो मिल जातीं जहाँ की ख़ुशियाँ
तेरा हर ज़ुल्मों सितम मुझ को गवारा होता

तिश्नगी होठों पे होती न नमी आँखों में
वक़्त-ए-आख़िर जो अगर साथ तुम्हारा होता
Aatish Muradabadi

Aatish Muradabadi | We The Sukhanwar