Mohit Subran (मोहित सुब्रन)

कोई तो है जो मन ही मन मुझे आवाज़ देता है
मैं जब भी बाँधता हूँ फंदा रस्सी टूट जाती है
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)

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