गायन कौन करेगा?

मैं यदि मिथ्या आरोपों से
डर कर आत्मसर्मपण कर लूँ
तो फिर मेरे लोकगीत का
घर-घर गायन कौन करेगा?

मेरा गीत नहीं है ऐसा
जिसकी तुम सब करो समीक्षा
पहले ख़ुद को देखो फिर तुम
लेना मेरी अग्नि-परीक्षा
मेरी सृजनशीलता देखो
सीता-सी है पतित-पावनी
इसका अपने अंतर्मन से
फिर निष्कासन कौन करेगा?

मेरा है यह दोष कि मैंने
मौलिकता की बाँह गही है
जो भी मेरे मन में आई
खुलेआम वह बात कही है
मैं ही अगर झूठ बोलूँगा
कठिन परिस्थतियों से डरकर
मेरी वरदानी वाणी को
फिर अभिवादन कौन करेगा?

उन फूलों को कौन पूछता
जिनमें बसी सुगन्ध नहीं है
जिसके पास गन्ध है उस पर
कोई भी प्रतिबन्ध नहीं है
गति अवरोधक बनकर मेरी
राहें तुम क्या रोक सकोगे
मैनें चलना छोड़ दिया तो
राह सुहावन कौन करेगा?
Dr. Urmilesh Shankhdhar