खादी-से दिन

कड़वे घूँट पिएँ फिर कैसे मीठे गीत लिखें?
तुम्हीं बता दो कैसे हम मन के विपरीत लिखें?

खादी-से दिन जीकर
कैसे लिखें रेशमीं रातें,
लोहे की निब से न लिखी-
-जातीं सोने की बातें
शंकित वर्तमान है कैसे इसे अभीत लिखें?

जिस धारावाहिक जीवन की
साँस-साँस सैंसर हो
इच्छाओं के प्रोड्यूसर पर
हावी डाइरेक्टर हो
जो अभिनेय न हो उसको कैसे अभिनीत लिखें?

आज शिल्प मालिक बन बैठा
ऊँचे सृजन-महल में
और कथ्य बैरागीरी
करता उसके होटल में
ऐसे में रचना कैसे हम आशातीत लिखें?
Dr. Urmilesh Shankhdhar