Dr. Urmilesh Shankhdhar

अपने क़दमों पे खड़े होने के क़ाबिल हो जा
छोड़ जलसों को जुलूसों में तू शामिल हो जा

राह-दर-राह गुबारों में भटकने वाले
तू भी इस बार किसी राह की मंज़िल हो जा

ज़िन्दगी लेके जो मजबूर करे जीने को
ऐसे क़ातिल का खुलेआम तू क़ातिल हो जा

तेरी मुश्किल का जो हल करने से कतराते हैं
मेरा मतलब है तू उन लोगों की मुश्किल हो जा

अब न वो महफ़िलें जो दर्द भुला दें तेरा
अपने नग़मों के लिए अपनी ही महफ़िल हो जा

क्या मिलेगा तुझे नफ़रत की अगन में जलकर
तू भी अब मेरी तरह तरह प्यार में गाफ़िल हो जा

माँगने से तो यहाँ चीज़ न मिलती कोई
अपने हक़ के लिए दुनिया के मुक़ाबिल हो जा
Dr. Urmilesh Shankhdhar

Dr. Urmilesh Shankhdhar | We The Sukhanwar