दौलत से, सियासत से, न ताकत से बना है
ये मुल्क शहीदों की शहादत से बना है
क्यों घर में ये दीवार खड़ी करने लगे तुम
ये घर बड़ी मुश्किल से, मुसीबत से बना है
नफ़रत से बने कोई भी हिन्दू या मुसलमां
इन्सान तो दुनिया में मुहब्बत से बना है
कुछ ऐशपरस्तों का है उस महल पे कब्ज़ा
वो महल जो मज़दूर की मेहनत से बना है
पत्थर जिसे भगवान समझती है ये दुनिया
वो सिर्फ़ हमारी ही इबादत से बना है
ज़ालिम की कोई कौम भला दोस्त हुई कब
हर क़ौम का इतिहास शराफ़त से बना है
वो धर्म किसे मोक्ष या निर्वाण दिलाए
वो धर्म जो कुर्सी की सियासत से बना है
Dr. Urmilesh Shankhdhar