Dr. Urmilesh Shankhdhar

दरवाज़े देख लेते हैं घर देखता है कौन
इस दौर में ऐ दोस्त ! हुनर देखता है कौन

अख़बार में हैं देखते सब अपना राशिफल
अन्दर छपी है किसकी ख़बर देखता है कौन

सब लोग जिस्म अपना तपाने में व्यस्त हैं
जलता है हसरतों का शहर देखता है कौन

कबसे खड़े हैं पेड़ यहाँ तेज़ धूप में
सब छाँव देखते हैं उधर देखता है कौन

हर रोज़ हो रहा है हक़ीक़त से सामना
आँखें खुली हुई हैं मगर देखता है कौन

सब लोग सिर्फ़ सुनने-सुनाने में हैं लगे
किस पर हुआ है कितना असर देखता है कौन

क़दमों का लड़खड़ाता सफ़र देखते हैं सब
साँसों का चलता-फिरता सफ़र देखता है कौन
Dr. Urmilesh Shankhdhar