जो इस ज़माने में सच्चाइयों के साथ रहे
वो, हमने देखा है कठिनाइयों के साथ रहे
न उनके सर को कोई धड़ नसीब हो पाया
जो तेरे सामने ऊँचाइयों के साथ रहे
हमें जो रोशनी मिलती तो किस तरह मिलती
हमेशा हम तेरी परछाइयों के साथ रहे
मिली बहार तो वे पेड़ काट डाले गये
भरी ख़िज़ां में जो अमराइयों के साथ रहे
मिली हैं ठोकरें हर मोड़ पर उन्हें, यारो
क़दम-क़दम पे जो अच्छाइयों के साथ रहे
तेरे फ़साने में उनका भी ज़िक्र तो होगा
जो उम्र भर तेरी रुसवाइयों के साथ रहे
हुई है जिस्म से कुछ ऐसी रूह की अनबन
हम अपने घर में भी तनहाइयों के साथ रहे
Dr. Urmilesh Shankhdhar