Dr. Urmilesh Shankhdhar

वो पहले रूह कि गहराइयों से बोलेगा
फिर उसके बाद तुझे जिस्म-जिस्म खोलेगा

तमाम दिन तो रहेगा वो तेरे पहलू में
हुई जो शाम किसी और का वो हो लेगा

वो अपने दाग़ छुपा लेगा अपने कपड़ों से
तेरा वजूद मगर आइने से तोलेगा

वो प्यार-व्यार के चक्कर में डालकर तुझको
अजीब ज़हर तेरी ज़िन्दगी में घोलेगा

तू अपने प्यार को ढक ले हज़ार परदों में
मगर ये जादू तेरे सर पे चढ़के बोलेगा

अभी है सुबह, अभी से न शाम कर ख़ुद को
अभी न सँभला तो फिर तार-तार हो लेगा
Dr. Urmilesh Shankhdhar