Aatish Muradabadi

ये सच है के दुश्मन बनेगा ज़माना
मुहब्बत जो की है तो हमसे निभाना

जहाँ की मुझे हर ख़ुशी मिल गयी है
तेरे प्यार का मिल गया है ख़जाना

बहुत ख़ाक गलियों की छानी है हमने
नहीं मिल सका तेरे घर का ठिकाना

मेरी ज़िन्दगी तू कहाँ छुप गई है
तेरे नाम का है जुबाँ पर तराना

तेरी बेरुख़ी भी सितम ढा रही है
ग़लत है तेरा मुझसे नज़रें चुराना

ये आतिश तेरे ग़म से जलता रहेगा
मुकम्मल न होगा ये हरगिज़ फ़साना
Aatish Muradabadi

Aatish Muradabadi | We The Sukhanwar