ये सच है के दुश्मन बनेगा ज़माना
मुहब्बत जो की है तो हमसे निभाना
जहाँ की मुझे हर ख़ुशी मिल गयी है
तेरे प्यार का मिल गया है ख़जाना
बहुत ख़ाक गलियों की छानी है हमने
नहीं मिल सका तेरे घर का ठिकाना
मेरी ज़िन्दगी तू कहाँ छुप गई है
तेरे नाम का है जुबाँ पर तराना
तेरी बेरुख़ी भी सितम ढा रही है
ग़लत है तेरा मुझसे नज़रें चुराना
ये आतिश तेरे ग़म से जलता रहेगा
मुकम्मल न होगा ये हरगिज़ फ़साना
Aatish Muradabadi