तुझमें हिम्मत है तो आ दर्दे जिगर देख ज़रा
कैसा होता है सराबों का सफ़र देख ज़रा
तेरी यादों ने भी मुँह मोड़ लिया है मुझसे
कितनी मुद्दत से है वीरान ये घर देख ज़रा
मैं भी आँखों में हँसी ख़्वाब लिये बैठा हूँ
मेरी जानिब भी कभी एक नज़र देख ज़रा
अब तो आइने भी करने लगे हैं मुझसे ये सवाल
छोड़ दुनिया को कभी अपनी ख़बर देख ज़रा
इस ख़राबे को भी ज़ख़्मों से सजा रक्खा है
पास आकर कभी दीवार ये दर देख ज़रा
अपनी रूदाद-ए-मुहब्बत भी सुनाऊँ किसको
कैसे उजड़ा है मेरे दिल का नगर देख ज़रा
कैसी आई मेरे गुलशन में ये आँधी आतिश
कैसे उजड़े हैं ये बर्ग-ओ-समर देख ज़रा
Aatish Muradabadi