ख़ुद ही के हिस्से की ख़ुशी पाने से रह गये
अपने ही साथ वक़्त बिताने से रह गये
वो सब बने जो आप बनाते गये हमें
हम यार ख़ुद को कुछ भी बनाने से रह गये
ये दुनिया हमसे रूठ गई आपके सबब
और उसपे आपको भी मनाने से रह गये
उसने इशारे ही नही समझा कभी मेरे
हर बार मेरे तीर निशाने से रह गए
इक रोज़ उसने हमको दिवाना-सा कह दिया
फिर उसके बाद हम भी दिवाने-से रह गये
Gulshan Mehra