Santosh sagar

मैं जब भी बात करता हूँ किसी से
उसे सुनता हूँ पहले ख़ामुशी से

मुझे सब कुछ दिया है ज़िंदगी ने
कोई शिकवा नहीं है ज़िंदगी से

फ़कत रस्ता था वो मंजिल नहीं था
सो आगे बढ़ गया हूँ मैं ख़ुशी से

मेरे सपने में आकर मीर बोले
बताओ क्या मिला है शाइरी से?

इसे अब तो नया सूरज दिखा दो
ये ऑंखें थक चुकी है तीरगी से

ख़ुदाया दुख की अब चादर हटा लो
नहीं तो जा मिलूँगा खुदकुशी से

मुझे हासिल नहीं मेहनत के दम पे
तुम्हे जो मिल गया है पैरवी से
Santosh sagar