Santosh sagar

तेरी यादों की गज़लें गा रहा हूँ
मैं परचम इश्क़ का लहरा रहा हूँ

जिसे लड़ना सिखाया दुश्मनों से
उसी से मात खाकर आ रहा हूँ

निकलते पर निकल जायेंगे पंछी
दरख़्तों को यही समझा रहा हूँ

मेरे आँखों के आँसू मर गये हैं
तेरी यादों से बाहर आ रहा हूँ
Santosh sagar