जब से तू मेरी ज़िन्दगी में आयी लौटकर
आँखों की मेरी आ गयी बीनाई लौटकर
होती है इंतज़ार की भी हद सो खाली हाँथ
आये हैं उनके दर से मेरे भाई लौटकर
इक दिन तुम्हे भी छोड़ के जाएगी बेवफा
इक दिन चली ही आएगी तन्हाई लौटकर
बेटा गया है मेरा तो मेरी ही शक्ल पर
आई है मेरे घर मेरी परछाई लौटकर
इमदाद को जो हाथ बढ़ाया ही था कि सब
मैदाँ से जा चुके थे तमाशाई लौटकर
रहने को कोई ठौर- ठिकाना नहीं मिले
तो आना अपने घर मेरे हरजाई लौटकर
Santosh sagar