Shravan Kumar

ये जो खोटे सिक्के चलाए गए हैं
नज़र में जमाने की लाए गए हैं

रही पूरे दिन इनकी आँखों पे पट्टी
उधर रात भर ये जगाए गए हैं

न पूछो यहाँ तीरगी का तुम आलम
ये जलते दिए थे बुझाये गए हैं

नहीं यूँ ही होती है आँखों से बारिश
ये मासूम दिल थे दुखाए गए हैं
Shravan Kumar

Shravan Kumar | We The Sukhanwar