तुम्हारी नज़र में न आना सही था
हमारे लिए वो ठिकाना सही था
उड़ा ले गई उन परिंदों को आँधी
शिकारी का वरना निशाना सही था
मोहब्बत ने ही घर उजाड़ा था दिल का
तो कैसे कहूं दिल लगाना सही था
किसी रोज़ तुझको भी कहना पड़ेगा
कि गुज़रा हुआ वो ज़माना सही था
उजड़ने से घर को बचाने की ख़ातिर
जो रूठे थे सबको मनाना सही था
Shravan Kumar