Shravan Kumar

सही लगने लगीं सभी बातें
मेरे उस्ताद की कही बातें

मेरी आंखों में झाँककर पढ़ते
मेरे दिल की वो अनकही बातें

मेरे अल्फ़ाज़ में नहीं आयीं
वो जो अश्कों में बह गई बातें

भोर तक जागती रही महफ़िल
रात-भर हमने की तेरी बातें

भीग जाते हैं कोर आँखों के
याद कर उसकी आख़िरी बातें

अब मिला गर कहीं तो कह दूँगा
जो भी कहने से रह गई बातें
Shravan Kumar