Aatish Indori

कुछ तो दिक़्क़त हैं ज़िंदगी के साथ
वरना दुख आते क्यों ख़ुशी के साथ

फूल ने मुझको यह नसीहत दी
ज़िंदगी जीना बेख़ुदी के साथ

वक़्त को साँस लेने देता हूँ
नहीं चलता हूँ मैं घड़ी के साथ

यार मेरे लिए ये मुश्किल है
ज़िंदगी जीना बेदिली के साथ

चाहता था विराट हो जाना
इसलिए चल पड़ा नदी के साथ
Aatish Indori

Aatish Indori | We The Sukhanwar