बात बनती नहीं बनाने सेबाज़ आ जा तू आज़माने सेरोशनी यूँ भी हो गई देखोबस तुम्हारे ही मुस्कुराने सेख़ुद को खोने से बच गए होतेबच के चलते अगर ज़माने से।खोए खोए से एक हम ही हैंबाक़ी सब हैं यहां ठिकाने सेShravan Kumar