Shravan Kumar

बात बनती नहीं बनाने से
बाज़ आ जा तू आज़माने से

रोशनी यूँ भी हो गई देखो
बस तुम्हारे ही मुस्कुराने से

ख़ुद को खोने से बच गए होते
बच के चलते अगर ज़माने से।

खोए खोए से एक हम ही हैं
बाक़ी सब हैं यहां ठिकाने से
Shravan Kumar