‘बौने‘ लोगों को उकसाया जायेगा
फिर ‘क़द’ पर इल्ज़ाम लगाया जायेगा
कांधों पर क़र्ज़े आ करके बैठ गये
कैसे अपना बोझ उठाया जायेगा
जनता को आदत है रोज़ बहकने की
जनता को हर दिन बहकाया जायेगा
रहज़न के साथी बन बैठे हैं गाइड
सबको रस्ते से भटकाया जायेगा
मजबूरी में हामी तो भरनी होगी
ख़ौफ़ दिखा कर जब समझाया जायेगा
धुआँ उड़ाकर बादल रंगे जाएँगे
वो बादल हर-सू बरसाया जायेगा
तुम काँटों की क्या तैयारी करते हो
तुमको बातों में उलझाया जायेगा
क्यूँ सरकार की तुमने चोरी पकड़ी है
तुम पर ये इल्ज़ाम लगाया जायेगा
क़ुदरत की ख़ुश्बू अब ख़ुश्बू नहीं रही
फूलों को परफ़्यूम लगाया जायेगा
बारिश जिसको पीकर प्यास बुझायेगी
ऐसा कब इक पेड़ लगाया जायेगा
Sanjaya Chaturvedi