मुश्किलों की राह यूँ मुश्किल बना देता हूँ मैं
मुश्किलें आ जायें तो बस मुस्कुरा देता हूँ मैं
बेरुख़ी से सीखकर आया हूँ मैं रुख़ मोड़ना
जाके रेगिस्तान में कलियाँ खिला देता हूँ मैं
हर सुबह हर शाम सतरंगी बनाने के लिए
आसमानी धुँध में सूरज मिला देता हूँ मैं
देवताओं के लिये मुश्किल खड़ी करता नहीं
बद-दुआ देते हैं उनको भी दुआ देता हूँ मैं
साफ़-दिल होकर कोई दुश्मन भी आ जाये अगर
सिर्फ़ पलकें ही नहीं दिल भी बिछा देता हूँ मैं
रूठ जाता है जो मेरा हमसफ़र मुझसे कभी
मोड़ करके उँगलियाँ इक दिल बना देता हूँ मैं
वक़्त का मरहम सिखाता है मुझे पक्का हिसाब
जोड़कर ख़ुशियों को सारे ग़म घटा देता हूँ मैं
लूटने वालों को मैं मौक़ा कभी देता नहीं
जो भी मेरे पास है ख़ुद ही लुटा देता हूँ मैं
Sanjaya Chaturvedi