Sanjaya Chaturvedi

उम्र के घोड़े पे चढ़ तू भी हवा से बात कर
ज़िंदगी कुछ दिन तू अब नाज़-ओ-अदा से बात कर

इससे पहले रौशनी का हर तरफ़ पहरा लगे
घर के बाहर जा ज़रा बाद-ए-सबा से बात कर

अब तलक तूने सभी से अपने ग़म साझा किये
आज तू ख़ुश है तो जा इक ग़मज़दा से बात कर

शेख़ और पंडित की बातों में उलझ मत, ख़ुद ही जा
‘गुफ़्तगू’ भगवान से कर और ख़ुदा से ‘बात’ कर

कौन है ऊपर उसे नाराज़गी तुझसे है क्या
कहकशां के साथ जा, काली घटा से बात कर

मंज़िलें ही दूर हैं या राह में कुछ खोट है
तेज़ चल, आगे निकल, जा रहनुमा से बात कर

इससे पहले नौकरी आ करके भर दे चाभियाँ
सीख ले तू भी अदब तर्ज़-ए-अदा से बात कर

क्यूँ झिझकता है तुझे कुछ चाहिए तो जा कभी
जा सुदामा की तरह अपने सखा से बात कर

उम्र से लड़कर किसी दिन बचपना बाहर निकाल
अपनी ही आवाज़ में कोह-ए-निदा से बात कर
Sanjaya Chaturvedi