Aatish Muradabadi

तू नहीं होता तो बढ़ जाता है ग़म देख ज़रा
मेरी जानिब भी कभी मेरे सनम देख ज़रा

यूँ अकेला मुझे ऐ छोड़ के जाने वाले
मुझ पे जो गुज़रे हैं ये रंजो अलम देख ज़रा

सूख जाते हैं यहाँ रोज़ समन्दर कितने
आ मेरे यार मेरा दीदा -ए-नम देख ज़रा

प्यार की राहों में जो छोड़े हैं मैंने उनको
तू भी इक बार वही नक़्शे क़दम देख ज़रा

भूलकर दैर-ओ-हरम केही वो सारे झगडे़
मन के मन्दिर को भी एै शेख़-ए-हरम देख ज़रा

ये कहानी कोई मामूली कहानी तो नहीं
दास्ताँ अपने सफ़र की है रकम देख ज़रा

मीरो ग़ालिब तो नहीं हूँ मैं यकीनन आतिश
देख तू फ़िक्र मेरी मेरा क़लम देख ज़रा
Aatish Muradabadi