Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

होश गँवा दूँ जिस को पी कर वो मय नहीं मयख़ाने में
मुझ को अश्क मिलाने होंगे अपने हर पैमाने में

आज के दिन का वक़्त मुक़र्रर उस ने किया है मिलने का
देखें कितनी देर बची है आज क़यामत आने में

तेरे होने से घर मेरा महका महका रहता था
तू जो नहीं तो अब रहता हूँ जैसे इक वीराने में

जा मैं ने आज़ाद किया अब तुझ को तेरे वा'दों से
तुझ को भी आसानी होगी मुझ को छोड़ के जाने में

अब तो आँखें ख़ुश्क हुई हैं उस की याद में रो रो कर
कोई बताए मुझ को कितनी देर है उस के आने में

वो तो ख़ुश हो कर सुनते हैं मेरी मोहब्बत का क़िस्सा
मेरा दम निकला जाता है दिल का हाल सुनाने में

'साहिल' बेहतर है रख ले सीने में छुपा कर ग़म अपना
वर्ना रुस्वा हो जाएगा दिल के ज़ख़्म दिखाने में
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"