कौन जीता है यार नफ़रत से
हार जाते हैं सब मुहब्बत से
रूह लरज़ाँ है देखकर नफ़रत
सबको दिल में बिठा रिफाक़त से
फै़सला उसके हक़ में होना था
ख़ूब वाक़िफ हूँ उसकी फ़ितरत से
आ अँधेरे मिटा दे क़िस्मत के
दिल हमारा घिरा है ज़ुल्मत से
ज़ख़्म तो जिस्मो जाँ को मिलते हैं
रूह तड़पी है इस इनायत से
जलवये हुस्न दूर रख मुझसे
ग़मज़दा हूँ मैं तेरी ख़िल्वत से
ख़ुद को आतिश मिटा दिया फिर भी
दर्दो ग़म ही मिला है चाहत से
Aatish Muradabadi