पहले पहल तो हमको बुलाया नहीं गया
फिर उसके बाद दर पे बिठाया नहीं गया
ताउम्र एक पेड़ के साये में काट दी
हर बा-समर की गोद में पाया नहीं गया
ग़लती से मेरे घर में अगर आग लग गयी
क्यूँ जान बूझ कर के बुझाया नहीं गया
ख़ुद-दारियाँ अना में अभी क़ैद है मेरी
बे-ग़ैरती का बोझ उठाया नहीं गया
फिर इश्क़ के खिलाफ़ ये तलवार चल पड़ी
सो इसलिए भी सर को झुकाया नहीं गया
शा'इर के घर में आग लगा दी गयी मगर
शा'इर का इक चराग़ बुझाया नहीं गया
Satyam Tripathi