Satyam Tripathi

पहले पहल तो हमको बुलाया नहीं गया
फिर उसके बाद दर पे बिठाया नहीं गया

ताउम्र एक पेड़ के साये में काट दी
हर बा-समर की गोद में पाया नहीं गया

ग़लती से मेरे घर में अगर आग लग गयी
क्यूँ जान बूझ कर के बुझाया नहीं गया

ख़ुद-दारियाँ अना में अभी क़ैद है मेरी
बे-ग़ैरती का बोझ उठाया नहीं गया

फिर इश्क़ के खिलाफ़ ये तलवार चल पड़ी
सो इसलिए भी सर को झुकाया नहीं गया

शा'इर के घर में आग लगा दी गयी मगर
शा'इर का इक चराग़ बुझाया नहीं गया
Satyam Tripathi

Satyam Tripathi | We The Sukhanwar