जिसके चेहरे पे नूर होता है
साफ़ दिल का ज़रूर होता है
दोस्त होता है आपका संयम
और दुश्मन ग़ुरूर होता है
बात करता है सर उठाकर वो
जब कोई बेकसूर होता है
उसको मिलता नहीं सुकूँ पल भर
जिसके मन में फ़ितूर होता है
कुछ बिगड़ता नहीं है पत्थर का
आईना चूर-चूर होता है
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं लगती
जब तू आँखों से दूर होता है
जगमगाता है तब वो लाखों में
जब कोई कोहिनूर होता है
Divya singh sisaudia