Anis shah anis

जो  रुख़ पे उसके तिल है, बेमिसाल है कमाल है
कि शह्र-ए-हुस्न का वो कोतवाल है, कमाल है

वो जैसे दश्त का कोई ग़ज़ाल है, कमाल है
कि शह्र में मचा हुआ धमाल है, कमाल है

सितारों से चमक रहे हैं झुमके उसके कान में
ये अबरू जैसे चर्ख़ पर हिलाल है, कमाल है

'अनीस' आई है उतर के जैसे कोह-ए-क़ाफ़ से
दयार-ए-दिल में इक परी-जमाल है कमाल है
Anis shah anis