सबब बने जो मेरी ख़ुशी का.. तो मैं उसी का
या कोई पैकर हो सादगी का.. तो मैं उसी का
शराब-ओ-साक़ी ये जाम-ओ-मीना नहीं ज़रूरी
जो आँख दे लुत्फ़ मय-कशी का.. तो मैं उसी का
न है तख़य्युल न है तग़ज़्ज़ुल तेरे सुख़न में
हो फ़िक्र-ओ-फ़न जिसमें शाइरी का.. तो मैं उसी का
यहाँ तो सबके हैं हम-पियाला व हम-निवाला
अभी तलक जो नहीं किसी का.. तो मैं उसी का
बड़ा है क़द आपका, मैं अदना मुआफ़ कीजै
मिलेगा कोई बराबरी का.. तो मैं उसी का
अना के घर से निकल के बाहर मेरी तरफ़ जो
बढ़ाएगा हाथ दोस्ती का.. तो मैं उसी का
उदासियों के हैं घुप अँधेरे 'अनीस' दिल में
दरीचा खोले जो रौशनी का.. तो मैं उसी का
Anis shah anis