Pooja Bansal

आने लगे मज़ा जो किसी इंतज़ार में
समझो की रूह क़ैद हुई है दिवार में

क्या बददुआ है इश्क़ को ,पूरा न हो सका
पंछी है ये ख़िज़ाँ का जो मरता बहार में

करना वहीं जो सह सको , ख़ुद पर भी वार तुम
आई ...ये बात उनको समझ चार बार में

जब जंग सी छिड़ी हो कभी दिल दिमाग़ की
लुटती है कायनात ही फिर दिल की हार में

साक़ी ने जाम भर तो दिया प्यास देख , पर
हमसे भी तिश्ना लब कई थे उस क़तार में

अव्वल रहेगी वस्ल की मन्नत में ये कशिश
खामोश हिज्र की भी सदा थी पुकार में

ख़्वाबों को रात भर का बयाना चुका दिया
देखा है उनको चोर नज़र से बज़ार में
Pooja Bansal

Pooja Bansal | We The Sukhanwar