Mayank Tiwari

पहले आँखें खोलता हूँ, आइना देता हूँ मैं
फिर सभी को सोचने का दायरा देता हूँ मैं

ज़िन्दगी को देखने का एक फ़न है शायरी
रोज़ इस फ़न को नया इक ज़ाविया देता हूँ मैं

झूठ कहने का हुनर आया नहीं, सो हर दफ़ा
हाल पूछे जब कोई तो मुस्कुरा देता हूँ मैं

हाथ फैलाकर कोई जब सामने आता है तो
कुछ नहीं करता हूँ केवल मशवरा देता हूँ मैं
Mayank Tiwari