सबकी हँसी ख़ुशी के हम औज़ार बनेंगे
हम कुछ नहीं बनेंगे तो फ़नकार बनेंगे
वैसे तो नौकरी का कोई शौक़ नहीं है
लेकिन हम हालतन तलबगार बनेंगे
तब अपने घर की खिड़कियों को खोल दूँगा मैं
जब अपने मिलने जुलने के आसार बनेंगे
बच्चों को कभी अपनी मोहब्बत न दे सका
ऐसे तो सभी के सब ख़ुद्दार बनेंगे
कुत्ते की तरह पालते हैं पत्नियों को और
दुनिया के सामने ये समझदार बनेंगे
Mayank Tiwari