Divya singh sisaudia

झगड़ा-वगड़ा, प्यार-मुहब्बत ज़िंदा है
तू जब तक है मुझमे चाहत ज़िंदा है

टूटी कश्ती में भी पार गए है लोग
कुछ लोगों में अब भी हिम्मत ज़िंदा है

जो औरों के ख़ातिर जीवन वार गए
आज तलक भी उनकी शोहरत ज़िन्दा है
Divya singh sisaudia