Satyendra Bharill

ख़ुद को इतना उबाल दूंगा मैं
सारा गुस्सा निकाल दूंगा मैं

याद की ट्रेन अब की गुज़री तो
दिल की पटरी निकाल दूंगा मैं

कोई पूछे सराय का मतलब
अपने दिल की मिसाल दूंगा मैं

अब तेरी बात भी नहीं करनी
कोई पूछे तो टाल दूंगा मैं

अब किसी रंग में नहीं ढलना
ख़ुद को अपना ख़्याल दूंगा मैं

ये मराहला छोड़ दो मुझ पर
कोई रस्ता निकाल दूंगा मैं
Satyendra Bharill