मेरी आँखों ने कहा मेरे ख़िलाफ़
बोलता है आईना मेरे ख़िलाफ़
मेरा मुंसिफ़ लिख रहा है आजकल
मेरे हक़ में फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़
साथ दुनिया थी खड़ी हर झूठ में
इक अकेला मैं खड़ा मेरे ख़िलाफ़
पढ़ रही है ज़िंदगी तकदीर का
फ़ैसला लिक्खा हुआ मेरे ख़िलाफ़
चाहे जो अंजाम हो परवा नहीं
मैं यकीनन बोलता मेरे ख़िलाफ़
Nivedan Mishra