Anis shah anis

सभी के मान की दुश्मन बनी है
अना इंसान की दुश्मन बनी है

बनी है जड़ फ़सादों की सियासत
ये हिंदुस्तान की दुश्मन बनी है

ये मँहगाई खड़ी मुँह खोले अपना
वबा भी जान की दुश्मन बनी है

हवस दौलत की पाली है सभी ने
यही ईमान की दुश्मन बनी है

तुम्हारी चुग़लियाँ करने की आदत
हमारे कान की दुश्मन बनी है

बहुत ही शोर करती याद तेरी
ये मेरे ध्यान की दुश्मन बनी है

'अनीस' ऐसी पड़ी पीछे ग़रीबी
मेरी पहचान की दुश्मन बनी है
Anis shah anis