तुम किसी का हाथ थामे

रात के उस स्वप्न का उल्लेख करना भी कठिन है
तुम किसी का हाथ थामे ले रही थी सात फेरे

मिल के सखियाँ रच रहीं थीं
हाथ पर मेहंदी तुम्हारे
आँख में आँसू लिए
मैं भी खड़ा था इक किनारे
इस पराजय पर ना जाने क्या कहेंगे गीत मेरे
तुम किसी का हाथ थामे ले रही थी सात फेरे

द्वार पर शहनाईयों की
धुन सजी थी ब्याह-वाली
और मंडप में खड़ा था
मौर साजे भाग्यशाली
आज मुझ पर क्रुद्ध हो कर काल ने यह पल उकेरे
तुम किसी का हाथ थामे ले रही थी सात फेरे

और तो कुछ था नहीं
बस देखना था नेह भरके
और पल पल मर रहा था
दृश्य कल का सोच करके
तुम विदा हो जाओगी अब साथ उसके कल सवेरे
तुम किसी का हाथ थामे ले रही थी साथ फेरे
Shubham Tripathi