अब से अपनों के बीच बैठेंगेहम दरख्तों के बीच बैठेंगेतुमको आदत है इन वज़ीरों की हम तो प्यादो के बीच बैठेंगेअब से रातों में जागना है हमेहम चरागों के बीच बैठेंगेपूरी दुनिया को जानना है हमेहम किताबों के बीच बैठेंगेदेवेश त्रिपाठी