देवेश त्रिपाठी

अब से अपनों के बीच बैठेंगे
हम दरख्तों के बीच बैठेंगे

तुमको आदत है इन वज़ीरों की
हम तो प्यादो के बीच बैठेंगे

अब से रातों में जागना है हमे
हम चरागों के बीच बैठेंगे

पूरी दुनिया को जानना है हमे
हम किताबों के बीच बैठेंगे
देवेश त्रिपाठी

देवेश त्रिपाठी | We The Sukhanwar