तुम्हारे नाम अपनी सारी श्रद्धा- भक्ति कर आए
हमारे वास्ते फिर भी तुम्हारे मुॅंह ज़हर आए
मेरी कमियाँ गिनाने वालों माथा पीट लोगे तुम
अगर कमियाँ तुम्हारी हम गिनाने पे उतर आए
तुम्हारी इस अराजकता पे हम चुप रह नहीं सकते
कृपादृष्टि तुम्हारी चन्द लोगों तक ही गर आए
ज़माने में नहीं मिलने की कसमें जिनसे खाए हैं
महज़ चेहरा उन्हीं का ही न जाने क्यूँ नज़र आए
बहुत मज़बूर होकर थामना पड़ता है अपना दिल
कभी ग़लती से भी उनके अगर अब हम शहर आए
मुहब्बत का तभी असली मज़ा आता है दुनिया में
मुझे बस तुम नज़र आओ,तुम्हें बस हम नज़र आएं
Piyush Prakhar