Anis shah anis

उसका हर झूठ सनद है, हद है
मेरी सच बात भी रद है, हद है

इक ही शाइर वो अदद है, हद है
जैसे ग़ालिब है असद है, हद है

ऐसी करता वो मदद है, हद है
छोटा करता  मेरा क़द है, हद है

भूख से लोग गँवाते हैं जान
और सड़ती ये रसद है, हद है

क़त्ल-ओ-ग़ारत ये तशद्दुद, नफ़रत
सब उसे लगता सुखद है, हद है 

मुँह पे तारीफ़ का पुल है उसके
दिल में दरिया-ए-हसद है, हद है

ज़ुल्म उसका कि 'अनीस' अपना ज़ब्त
सब कहो साथ कि हद है, हद है
Anis shah anis