रश्मि श्रीवास्तव शफ़क़

क्या कहें ख़ातिर किसी की‌ क्यों ज़हर हमने पिया है
उसके हर इल्ज़ाम को सिर माथे पे अपने लिया है

ख़ुश रहे हर हाल में वो,हो जहां भी जिस तरह से
हिज़्र का‌ ग़म जाने क्यों हमको भला उसने दिया है

ये नहीं फ़ितरत हमारी, दें  किसी को बददुआ हम
अपनी सबकी ज़िन्दगी है ,चाहे जो जैसे जिया है

बंद   है   दरवाज़े  घर  के  और  सारे  रास्ते  भी
जाने क्यों दिल ने तड़प कर नाम उसका ही लिया है

जाने कितनी बार चाहा दें भुला यादों को उसकी
आह निकली तो शफ़क़ ने याद उसको ही किया है
रश्मि श्रीवास्तव शफ़क़

रश्मि श्रीवास्तव शफ़क़ | We The Sukhanwar