Harshit shukla

चाँद-तारों सजी मदभरी रात है
सुरमयी-सुरमयी संदली रात है

खिलके बिखरेगी अब पाँखुरी-पाँखुरी
प्यार की सेज पर इक कली रात है

अपनी यादों के लॉकर में रक्खो इसे
ये मोहब्बत भरी क़ीमती रात है

रात आई रुकी और ढल भी गयी
रात-भर यूँ लगा तिश्नगी रात है

रफ़्ता-रफ़्ता फिसलती रही हाथ से
सुबह को ये लगा मतलबी रात है

आज की रात को आओ ऐसे जियें
आज की रात ज्यों आख़िरी रात है

आज की रात है सौंप दी आपको
अब संभालें इसे आपकी रात है
Harshit shukla

Harshit shukla | We The Sukhanwar