मर्ज़ी है तुम्हारी उनकी सिम्त न जाओ मेले में
लेकिन उन आवाज़ों का भरम न तोड़ो मेले में
पागल, मौजी, दीवाना, पीर, फ़क़ीर और सौदागर
इक रूप चुनो इनमें से और खो जाओ मेले में
असली-नक़ली ठग-साधु मस्त-कलंदर जादूगर
सब आए हैं मेले में तुम भी आओ मेले में
बस्ती की बासी शक्लें कब तक देखोगे आख़िर
बंजारों की टोली के साथ में घूमो मेले में
कोने में जा सकते हो मेले से कट सकते हो
तन्हाई पा सकते हो फिर भी तुम हो मेले में
saleem sarmad