ये बात सोच करके है बढ़ता मलाल और
तेरे ख़याल और हैं मेरे ख़याल और
मिलना अगर नसीब में लिखा नहीं है तो
चाहत भरी नज़र भी मुझपे न डाल और
लोगों के आज-कल के हैं बस यही मिज़ाज
पगड़ी है दूसरे की- इसको उछाल और
टूटा हुआ था जिस दिन तुझको मिला था मैं
अब तो सँभल चुका हूँ थोड़ा सँभाल और
हो जाएगी फ़तह तेरी आसमान पर
थोड़ी उछाल और बस थोड़ी उछाल और
Mukesh Chanchal